भीड़ भरती थी भारी, कभी शाम को तो कभी भरी दुपहरिया में, कुछ चेहरे अनुभावों वाले चांदनी भीड़ भरती थी भारी, कभी शाम को तो कभी भरी दुपहरिया में, कुछ चेहरे अनुभावों ...
पंछियो का है इन पर बसेरा पंछियो का है इन पर बसेरा
ज़िंदगी सवार कर रखनी चाहिए ज़िंदगी सवार कर रखनी चाहिए
सारी दुनिया की खुशियाँ , तुमने अपनी नन्ही बाँहों में समेटी, आई लव यू , ओह मेरी छो सारी दुनिया की खुशियाँ , तुमने अपनी नन्ही बाँहों में समेटी, आई लव यू ,...
आया ऋतुराज वसंत मिट्टी सोंधी सी महक उठी है, मेरे आँगन में भी चिड़िया चहकी है। आया ऋतुराज वसंत मिट्टी सोंधी सी महक उठी है, मेरे आँगन में भी चिड़िया चहक...
सुलगी सी कविता सुलगी सी कविता